मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

ये सिला मिला है मुझको तेरी दोस्ती के पीछे

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ये सिला मिला है मुझको तेरी दोस्ती के पीछे
की हजारों गम लगे हैं, मेरी ज़िन्दगी के पीछे...

ना तो दिल का कोई मकसद,
ना तो मेरी कोई मंजिल
मैं चला हूँ क्यों ना जाने
किसी अजनबी के पीछे

तेरे आस्तां से सरको
मैं उठाऊंगा ना हरगिज़
मैं कहाँ कहाँ ना भटका
तेरी बंदगी के पीछे

मुझे कहके तुम शराबी
ना करो जहाँ में रुसवा
कोई राज़ भी तो होगा
मेरी मयकशी के पीछे

कोई उनसे जाके इतना
ज़रा ए 'शकील' कह दे
मैं हूँ आज जहाँ में रुसवा
तेरी आशिकी के पीछे..

ये सिला मिला है मुझको तेरी दोस्ती के पीछे
की हजारों गम लगे हैं, मेरी ज़िन्दगी के पीछे...

-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=
-देव

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

ये सिला मिला है मुझको तेरी दोस्ती के पीछे
की हजारों गम लगे हैं, मेरी ज़िन्दगी के पीछे...

-बहुत बढ़िया!

Shekhar Kumawat ने कहा…

कोई उनसे जाके इतना
ज़रा ए 'शकील' कह दे
मैं हूँ आज जहाँ में रुसवा
तेरी आशिकी के पीछे..

ये सिला मिला है मुझको तेरी दोस्ती के पीछे
की हजारों गम लगे हैं, मेरी ज़िन्दगी के पीछे...


-बहुत सुन्दर!

bahut khub
DIL KI GAHRAI ME LE GAYE AAP HAME


shkehr kumawat

संजय भास्कर ने कहा…

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।