शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

ससुरा टाई काहे पहिना रहे हो बे....

यार आज सुबह सुबह ना जाने किसका मुंह देख कर उठे थे, दिन भर कुछ भी सीधा नहीं हुआ । आज ऐसा लग रहा था जैसे कुछ ना कुछ उल्टा हो के रहेगा… आप लोग भी सुनिये मेरी आज की आप बीती । ना जाने कम्पनी में कौन सा गोरा राउंड मारने आ रहा था कि फ़तवा ज़ारी हो गया कि आज कंठ लंगोट अर्थात टाई लगा के आनी है, बस देव बाबा को ना चाहते हुए भी आज टाई लगा के घर से निकलनें को बाध्य होना पडा । घर से नीचे उतरा और गाडी की पार्किंग कवर हटाते समय ही पहला पंगा हो गया… यार मेरे पडोस में एक महापुरुष ने एक कुत्ता पाला है, उस ससुरे नें आज बडी विकटता से भौंकना शुरु कर दिया… मैंने कहा भाई जल मत… आज तो मैनें भी मेरे गले में पट्टा डाला हुआ है सो आज तो मैं तेरा ही भाई बन्धु हूं… मगर वह ससुरा तब तक भौकता रहा जब तक मैं कार ले के निकल नहीं गया । वैसे यह झांकी थी… अभी पूरे दिन की मारा-मारी बाकी थी… । बस किसी प्रकार से निकले और कालोनी के गेट के आगे एक और पंगा हो गया, मामा लोगों अपनें पूरा गैंग के साथ गेट पर आने और जाने वाली सभी गाडिओं की सघन तलाशी अभियान में व्यस्त थी । आमची मुम्बई की भाषा में कहें तो तपासणी साठी पास दाखवा... कम्बख्त मारे.... बाय गाड के चप्पल की कसम... पूरा बीस मिनट लग गया । देव बाबा टाई लगाए अपनें आप को एकदम बाबू समझते हुए बैठे हुए थे और सरकारी दामाद लोग अपना काम कर रहे थे....

बहरहाल मानखुर्द से घाटकोपर लिंक रोड लेकर ईस्टर्न एक्सप्रेस वे पर पहुंचा ही था की एक बडे से ट्रक नें मेरे बाएं से मुझे ओवरटेक किया.... अबे ओवरटेक क्या किया दुष्ट नें जान ही निकाल दी थी बस.... बमुश्किल ६ इंच... मगर बच गए... इतना ही होकर हमारी कुण्डली से राहू निकल गया होता तो भी ठीक होता... असली पंगा तो हो गया हीरानंदानी में..... मेरे बाएं साईड से एक मोहतरमा मुंह, आंख और कपार (माथा) पर दुपट्टा लपेटे एक्टिवा टाईप की गाडी से मुझे उल्टे साईड से ओवरटेक करनें के प्रयास में अपना बैलेन्स खो गयी और ठीक हमारी गाडी के सामनें धडाम.... साहब देखते देखते जाम और जमावडा लग गया... कुछ लोगों नें तो हमें ना जानें कैसे कैसे अलंकारों से संबोधित भी कर डाला । इसके पहले की भीड हमारा पूजन करती.... हमारे काम आया ड्यूटी पर लगा हुआ मामा जिसनें पूरा वाक्या अपनी आंखो से देखा था । उसनें उस मोहतरमा को निकलनें के लिये कहा और हमें बोला की "जाउ द्या साहेब, तुमि जाउ सक्तो"... मैनें मन ही मन उसको बहुत धन्यवाद दिया.... और एक बात और समझ गये... की भैया टाई लगा के अगर हिन्दुस्तानी सडक पर निकल गये तो आम इंसान भले करे ना करे.... वर्दी वाले इज्जत करते हैं.... वैसे यह बात शायद अपने आप को खुश रखने के लिये ही कह लें तो भी क्या बुरा है.....

वैसे पूरा दिन ओफ़िस में कैसा रहा उसके बारें में क्या कहें.... ना जानें कौन इस बात का निर्णय लेता है की ओफ़िस में फ़लां फ़लां टाईप की ड्रेस वर्जित है और फ़लां फ़लां टाईप की ड्रेस ज़रुरी है । अबे काम से मतलब रखो ना... क्या फ़ालतू की टांय टांय लगाई हुई है । जबरिया देव बाबा जैसे देसी आदमी को टाई के जंजाल में फ़सा दिया.... बहु-राष्ट्रीय कंपनी के लिये काम करना है मगर फ़िर भी क्या ज़रुरी है की अंग्रेजियत को अपना लिया जाए....

तो भैया सोचिए कुक्कुरवा का पट्टा है ये या फ़िर किसी तरक्की की निशानी और या फ़िर कुछ और...... और हम तो भैया हिन्दुस्तान की सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय के किसी बन्दे से इतना ही पूछेंगे की भैया.... कोई तो छडी चलाओ... और कम्पनिओं से ड्रेस कोड हटाओ.... नहीं तो केवल इतना पूछ भर दो की ससुरा टाई काहे पहिना रहे हो बे....

-देव

12 टिप्‍पणियां:

राजेन्द्र मीणा ने कहा…

kya kahe ..bas..maza aa gaya

http://athaah.blogspot.com/

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! देव बाबा जब टाई पहर ही लिए थे तो एक ठो फोटू हैंचवा कर यहाँ सांट देते टाई में. :)

संजय भास्कर ने कहा…

are wahhhhhhhhhh

Vivek Rastogi ने कहा…

हे हे हे तब ही न हम बहुराष्ट्रीय कंपनी में जाने से डरते हैं, ऐ ससुरे कंठ लगोट पहरा देते हैं :)

PADMSINGH ने कहा…

हा हा हा .... रोचक !

Sanjay Sharma ने कहा…

अच्छी रचना है ।

ललित शर्मा ने कहा…

बहुत उम्दा

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

कंठ लंगोट की कथा बहुत मजेदार रही झा साहेब. धन्यवाद.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

हा...हा...हा...बहुत खूब ....!!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बच ही गए थे नहीं तो कंठ लंगोट को ही धर के पब्लिक सब बहुत जुताती कहे तुम और हम गिरे हो तो कोनो बात नहीं खे पर अगर कोनो जनानी गिर गयी तो........... बाप रे बाप.......... सब का सब हीरो बनने आ जाता है !!

tapish ने कहा…

maza agaya

tapish ने कहा…

maza agaya